!! श्री दुर्गाष्टकम् !!



!! श्री दुर्गाष्टकम् !!










कात्यायनि महामाये

खड्गबाणधनुर्धरे।

खड्गधारिणि चण्डि

दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥1॥




वसुदेवसुते कालि

वासुदेवसहोदरि।

वसुन्धराश्रिये नन्दे

दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥2॥




योगनिद्रे महानिद्रे

योगमाये महेश्वरि।

योगसिद्धिकरी शुद्धे

दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥3॥




शङ्खचक्रगदापाणे

शार्ङ्गज्यायतबाहवे।

पीताम्बरधरे धन्ये

दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥4॥




ऋग्यजुस्सामाथर्वाण-


श्चतुस्सामन्तलोकिनि।

ब्रह्मस्वरूपिणि ब्राह्मि

दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥5॥


वृष्णीनां कुलसम्भूते

विष्णुनाथसहोदरि।

वृष्णिरूपधरे धन्ये

दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥6॥


सर्वज्ञे सर्वगे शर्वे

सर्वेशे सर्वसाक्षिणि।

सर्वामृतजटाभारे

दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥7॥


अष्टबाहु महासत्त्वे

अष्टमी नवमि प्रिये।





अट्टहासप्रिये भद्रे

दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥8॥


दुर्गाष्टकमिदं पुण्यं

भक्तितो यः पठेन्नरः।

सर्वकाममवाप्नोति

दुर्गालोकं स गच्छति॥9॥



॥ इति श्रीदुर्गाष्टकं सम्पूर्णम् ॥

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